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10 में से 4 बच्चों को मिलता है मां का दूध, बनेगा मदर मिल्क बैंक

10 में से 4 बच्चों को मिलता है मां का दूध, बनेगा मदर मिल्क बैंक
10 में से 4 बच्चों को मिलता है मां का दूध, बनेगा मदर मिल्क बैंक

यूपी में अब भी 10 में से 4 बच्चों को मां का पहला दूध नसीब नहीं होता। जन्म के एक घंटे के अंदर मिलने वाला मां का दूध बच्चे को कई बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है लेकिन प्रदेश में सिर्फ 25.2 फीसदी बच्चे ही यह दूध पी पाते हैं। यह आंकड़ा देश के औसत आंकड़े से काफी कम है। केन्द्र सरकार के इन चिंताजनक आंकड़ों के बाद प्रदेश सरकार स्तनपान जागरूकता के लिए अभियान चलाने जा रही है। इसके लिए 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस कार्य में NHM और उसकी सहयोगी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। आशा और ANM की मदद से गांव-गांव तक यह बात पहुंचायी जाएगी कि मां का दूध शिशु के लिए कितना जरूरी है। इसमें अच्छा काम करने वाली इकाइयों को सम्मानित किया जाएगा। माताओं को भी बताया जाएगा कि यह बच्चे और मां दोनों की सेहत के लिए अच्छा है।

41.6% देश के औसत शिशुओं को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध मिलता है
41.6% यूपी के शिशु जन्म के 6 माह तक मां का दूध पी पाते हैं
54.9% देश का औसत जिन्हें जन्म के छह माह तक मां का दूध मिलता है

मां के दूध के फायदे
– जिन्हें मां का दूध पीने को मिलता है, उनके जीवित रहने की संभावना 14 प्रतिशत बढ़ जाती है
– नवजात को निमोनिया, डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है मां का दूध
– छह महीने तक मां का दूध बच्चे के पोषण की सभी जरूरतें को पूरा करता है
– बच्चे को दूध पिलाने से मां भी ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियां से बची रहती है

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बनेगा मदर मिल्क
यूपी में मदर मिल्क बैंक बनेगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एनएचएम के जीएम अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि इसके लिए फिलहाल दिल्ली के कलावती अस्पताल के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें मां अपना दूध सुरक्षित रख सकेंगी और जरूरत पड़ने पर ले सकेंगी। इससे खासतौर से कामकाजी महिलाओं को राहत मिलेगी। इसके अलावा उन नवजातों को भी दूध मिल सकेगा, जिनकी मां प्रसव के बाद ब्रेस्ट फीडिंग की स्थिति में नहीं हैं। मदर मिल्क बैंक के लिए SGPGI, KGMU जैसे अस्पतालों ने रुचि दिखाई है। लखनऊ के अस्पतालों में रोज ऐसे मामले आते हैं, जिनमें मां के दूध से नवजात वंचित हो रहे हैं। इन हालातों में मदर मिल्क बैंक नवजात को उचित पोषण देने के लिए कारगर साबित हो सकते हैं।

6 महीने तक सुरक्षित रहता है दूध
मदर मिल्क बैंक में इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप मशीन होती है। इसके माध्यम से डोनर से दूध लिया जाता है। इस दूध का माइक्रोबायलॉजिकल टेस्ट होता है। रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता सही होने के बाद उसे कांच की बोतलों में 30-30 मिलीलीटर की यूनिट बनाकर -20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर सुरक्षित रख दिया जाता है। बैंक में दूध 6 महीने तक सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर यह नवजातों को दिया जाता है।

आंकड़े बोलते हैं
25.2% यूपी के शिशुओं को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध नसीब होता है

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