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लोग साथ मिलकर करते थे शौच, प्राचीनकाल में हुआ करती थीं कान खड़े कर देने वाली प्रथाएं बिल्ली को मारा तो सजा-ए-मौत।

लोग साथ मिलकर करते थे शौच, प्राचीनकाल में हुआ करती थीं कान खड़े कर देने वाली प्रथाएं बिल्ली को मारा तो सजा-ए-मौत।
लोग साथ मिलकर करते थे शौच, प्राचीनकाल में हुआ करती थीं कान खड़े कर देने वाली प्रथाएं बिल्ली को मारा तो सजा-ए-मौत।

हम सभी ने कभी ना कभी अपनी दादी-नानियों से कई तरह की कहानियां सुनी ही हैं। जब भी हम उनके दौर की कहानियां सुनते हैं तो लगता है कि यार उनका जमाना हमारे जमाने से कितना अलग था। फिर यदि हम दादी-नानी के बहुत पहले के पूर्वजों की बात करें तो उनकी तो दुनिया ही बड़ी अलग थी। हम आज भी किताबों आदि में उस समय के नियमों और प्रथाओं आदि के बारे में पढ़ सकते हैं। आज हम जो काम करते हैं, उनमें से कई सारे काम प्राचीन समय में भी हुआ करते थे, लेकिन उन्हें करने का तरीका बहुत अलग हुआ करता था। उस दौर में कई ऐसी प्रथाएं होती थीं, जिनके बारे में सुनकर ही हमारे रोंगटे खड़े हो जाए। प्राचीन समय के लोग सुंदर दिखने और बीमारियों के इलाज के लिए भी बड़े ही खतरनाक तरीके अपनाते थे। आज बात इसी विषय पर। जरा ध्यान से पढ़ना। मामला थोड़ा रोचक है।
बिल्लियों के लिए आईब्रो उड़ाना
प्राचीन इजिप्ट में बिल्लियों की पूजा की जाती थी। ‘Egyptian Goddess Bastet’ को घर, बिल्लियाें और प्रजनन की देवी माना जाता था। उन्हें भी बिल्ली के रूप में ही दर्शाया जाता था।
बिल्लियों के लिए आईब्रो उड़ाना

हटा लेते थे आईब्रो
जब किसी के यहां बिल्ली की मौत हो जाती थी, तो लोग शोक स्वरुप अपनी एक भौंह को हटा लेते थे। बिल्ली को मारने पर मौत की सजा का भी प्रावधान था।

बालों की डाई करना
बालों को डाई करना तो आज भी बहुत ही कॉमन प्रैक्टिस है। मगर प्राचीन समय में रोम और ग्रीक में सल्फर जैसे खतरनाक केमिकल्स से बालों को डाई किया जाता था।
बालों की डाई करना
मानसिक रोगों का इलाज
ये तो हम सभी जानते हैं कि उस दौर में अन्धविश्वास भी बहुत ज्यादा था। जब किसी को मानसिक बीमारी हो जाती थी तो उसे डॉक्टर के यहां ले जाया जाता था। ताकि उसके दिमाग से बुरी आत्मा को निकाला जा सके।
मानसिक रोगों का इलाज
सर्जरी का सहारा
इस ‘बुरी आत्मा’ को बाहर निकालने के लिए जानलेवा सर्जरी का सहारा लिया जाता था। इस प्रक्रिया में आत्मा को निकालने के लिए सिर में ड्रिल से छेद किया जाता था।
सर्जरी का सहारा
स्तनों का ऐसा ट्रीटमेंट
खूबसूरती पर प्राचीन समय से ही बढ़-चढ़कर काम किया जाता था। उस दौर में परफेक्ट फिगर के लिए लोग तरह-तरह के प्रपंच अपनाते थे। पहली चेस्ट ऑग्मेंटेशन सर्जरी भी 1895 में Vincenz Czerny नाम के डॉक्टर ने की थी।
स्तनों का ऐसा ट्रीटमेंट
लगाते थे इंजेक्शन
डॉक्टर्स महिलाओं के स्तनों में Paraffin का इंजेक्शन लगाते थे। इसका असर कुछ समय तक ही नजर आता था और बाद में इन महिलाओं के ब्रेस्ट हार्ड हो जाते थे। इससे इन्फेक्शन का खतरा भी बहुत अधिक होता था।
लगाते थे इंजेक्शन
प्राचीन पब्लिक टॉयलेट्स
प्राचीन रोम में पब्लिक टॉयलेट्स होना बहुत आम बात थी और लोग इसे लेकर सहज भी थे। बाथरूम जाना भी लोगों के लिए एक सोशल एक्सपीरियंस हुआ करता था।
प्राचीन पब्लिक टॉयलेट्स
साथ में बैठना पड़ता था
गांवों में अगर जंगल में जाते भी हैं तो छुप-छुपकर शौच करते हैं। मगर इस तरह एक-दूसरे के सामने बैठकर शौच करना बहुत अजीब था। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय अमीर लोग ही प्राइवेट बाथरूम बनवा सकते थे।

जानवरों की ‘शौच’ की दवा
प्राचीन समय में जानवरों की शौच को भी दवाई की तरह इस्तेमाल किया जाता था। मगरमच्छ की पॉटी का प्रयोग गर्भनिरोधक के रूप में किया जाता था और भेड़ की लेंडी का प्रयोग स्मॉल पॉक्स के लिए किया जाता था।
जानवरों की 'शौच' की दवा
घाव भरने के लिए
इतना ही नहीं, कुछ कल्चर में इसका इस्तेमाल घाव भरने के लिए भी किया जाता था। साथ ही सूअर के शौच से नोज ब्लीडिंग पर भी लगाम कसी जाती थी।
घाव भरने के लिए
बेटी की हत्या
रोमन सभ्यता में महिलाएं शादी के बाहर संबंध नहीं बना सकती थीं। और तो और शादी के बाद भी वो पिता के परिवार से बंधी हुई थी। पिता जरूरत पड़ने पर अपनी बेटी को मार भी सकते थे।
बेटी की हत्या

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अगर नाम खराब हो जाए
यदि पिता को लगता था कि उनकी बेटी के प्रेमी ने ऐसा कोई काम किया है, जिससे इनका नाम खराब हुआ है तो वो कानूनी रूप से उसे मार सकता था।
अगर नाम खराब हो जाए

काले दांत
इस प्रैक्टिस को खासतौर से जापान में फॉलो किया जाता था। इसमें लोग (खासतौर पर महिलाएं) अपने दांतों को काले रंग से डाई कर लेती थीं। इस प्रैक्टिस को खूबसूरती का प्रतीक माना जाता था।
काले दांत
पत्नियों की बिक्री
मध्यकालीन युग में महिलाओं पर उनके पतियों का पूरा-पूरा हक होता था। महिलाओं का प्रॉपर्टी पर कोई अधिकार नहीं होता था, बल्कि वो अपने पति की प्रॉपर्टी बन जाती थी। 17वीं सदी के दौरान पुरुष अपनी पत्नियों को बेच भी सकते थे।
पत्नियों की बिक्री

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